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शिक्षक की पीड़ा-शिक्षक दिवस पर


हर साल की तरह
इस साल भी मनाया जाएगा
शिक्षक दिवस
सम्मानित किए जाएंगे शिक्षक
सरकार द्वारा
पुरस्कार स्वरुप दिए जाएंगे
चेक,सर्टीफिकेट और मेडल
साथ में लंबे-चौड़े भाषण भी
विद्यार्थी स्कूलों के,कॉलेजों के
यूनिवर्सिटियों के
अपने शिक्षकों को
कुछ न कुछ जरूर देंगे
केक काटेंगे,फिर बांटेंगे
यूँ एक दिन मनाकर
फिर इसको भुलाएंगे
अगले पाँच सितम्बर तक
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गुरु-शिष्य परंपरा
विलुप्तप्राय है
या इसके मायने
बदल गए हैं
हाँ यह सम्बन्ध
अब फ्रेंडली है
सीखने के अवसर बढ़ें हैं
दोनों के लिए
गूगल टीचर द्वारा
किन्तु
नैतिक मूल्यों का ह्रास
होता जा रहा है
जो आदर,सम्मान शिक्षकों
को पहले मिलता था
ओ अब नहीं दिखायी देता है
शिक्षकों को धमकाना
छात्रों द्वारा
बेवजह परेशान करना
अधिकारियों द्वारा
प्रताड़ित करना
अभिभावकों द्वारा
यह शिक्षक का अपमान है
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जब बदसलूकी की जाती है
शिक्षक के साथ
क्यों आँख मूँद लेते हैं लोग
जबकि शिक्षक उन्हीं के
बच्चों को पढ़ाता है
गिनती,पहाड़ा,वर्णमाला
सिखाता है
सदाचार और संस्कार
बच्चे भी अपने पिता के
दुर्व्यवहार से
क्षुब्ध है
शिक्षक वर्ग दुःखित और आक्रोशित है
वह अपना पुरस्कार भी
नहीं लौटा सकता है
इसलिए कि लोग कहेंगे
तब लिया ही क्यों था
यह शिक्षक की पीड़ा है

रचनाकार
योगेन्द्र प्रताप मौर्य
बरसठी,जौनपुर
8400332294

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