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llशिक्षक संदर्शिकाll

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वह प्रतिदिन उस जगह पर जाता है।
बच्चों में सहजता से 
घुल मिल जाता है।
जिसकी उपस्थिति मात्र से ही
पुलकित हो उठता है बच्चों का मन।
सृजित हो जाता है एक आनंदमयी वातावरण।
 और प्रारंभ हो जाती है
सीखने सिखाने की प्रक्रिया।
अब वह जगह बन जाता है एक विद्यालय 
वह कोई और नहीं प्राइमरी का शिक्षक है।

वह प्रतिदिन बच्चों के अन्तर्मन को पढ़ता है।
गढ़ता है उनके मनोभावों को 
सामाजिक बनाने केलिए।
तराशता है उनमें संस्कारों को
व्यावहारिक बनाने केलिए।
और दूर करता है कौतूहल जिज्ञासा का भाव भरने के लिए। 
यहीं से प्रारंभ होता है
शिक्षक से विद्यार्थी का अटूट रिश्ता।
जो जन्म देता है नित नए आविष्कारों को
वह कोई और नहीं प्राइमरी का शिक्षक है।

वह प्रतिदिन बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाता है।
निगरानी करता है उनकी
क्यारियों में लगे पौधों की तरह।
अभिसिंचित करता है उन्हें
अपने कर्तव्यों की बौछार से।
काट छांट कर सहेजता है उन्हें अपने स्नेहिल व्यवहार से ।
कलम किताब और ज्ञान ही
जिसकी पूंजी है
वह कोई और नहीं प्राइमरी का शिक्षक है
जिसके हाथ में बच्चों के सफलता की कुंजी है।

✍️
संगीता श्रीवास्तव
प्राथमिक विद्यालय झरवा
ब्लाक... खोराबार
गोरखपुर

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