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अध्यापक

अध्यापक

माता -पिता ,मित्र का संगम,
एक अध्यापक होता है ।
पारिजात का बीज अक्षर,
वह बच्चे के मन में बोता है ।
बच्चों का साथी बनकर, 
बच्चा बन जाना होता है ।
एक अध्यापक को बच्चों के,
मन से जुड़ जाना होता है ।

पहला कदम विद्यालय की ,
दहलीज पर रखता है बच्चा ।
अपने माँ-पिता की ऊँगली को,
छोड़ कहाँ पाता बच्चा ?
तब घुटनों के बल बैठकर, 
अपना हाथ बढ़ाना होता है ।
एक अध्यापक को बच्चों के ,
मन से जुड़ जाना होता है ।

जब उनको कहानी सुनानी हो
या कविता पाठ कराना हो ।
अध्यापक बचपन का अपने, 
कालखण्ड दोहराता है ।
कभी जोकर ,कभी बन्दर बनकर ,
सीख बताना होता है ।
एक अध्यापक को बच्चों के ,
मन से जुड़ जाना होता है ।

किताबें बोझ नहीं होती हैं,
ये हैं तितली के पंखों सी ।
कठिन सवाल गणित का हो
या कोई मुश्किल जीवन की ।
उनके कोमल मन को सहलाकर ,
हल बतलाना होता है ।
एक अध्यापक को बच्चों के 
मन से जुड़ जाना होता है ।

 ✍️
डॉ० निधि लता सिंह
प्रधानाध्यापिका प्राथमिक विद्यालय नैयापारखुर्द          वि o ख o-पिपराइच
 जिला- गोरखपुर

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