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वो एक औरत है।

सिमट कर अपनी दहलीज में
बँधकर अपनी मर्यादा में
अवहेलना का दंश
करूण क्रंदन
और झुलसा मन
लेकर जीवित रहेगी
वो सदा युगों-युगों तक।


एक अघोषित पृथकता
अलिखित निर्जीवता
रिवाजों का पर्दा
और अंतहीन बेबसी
लेकर जीवित रहेगी
वो सदा युगों-युगों तक।


इस सभ्य समाज में
तिरस्कृत दृष्टि
उपेक्षित साँसें
और मृतप्राय जीवन
लेकर जीवित रहेगी
वो सदा युगों-युगों तक


ये तो प्रारब्ध है उसका
वो एक औरत है
वो पहुँची तो चंद्रमा पर भी
पर अन्ततः
वो एक औरत है
नित्य नये आयाम रचती
पर अफसोस
वो एक औरत है।


लेखिका : 
✍  अलका खरे
प्र0अ0
कन्या प्राथमिक विद्यालय रेव,
ब्लॉक मोठ
जनपद झांसी




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