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नेपथ्य

नेपथ्य

है कोई नेपथ्य में
जो लिख रहा है वृत्तान्त सारा
भेद किंचित भी नहीं है
क्या हमारा क्या तुम्हारा..!

ब्रह्म के गति में तनिक
संशय दिखाना व्यर्थ है
हानि-लाभ जो भी हो
सन्निहित एक अर्थ है

दे रहे हैं तो हरेंगे
मनुज का वो क्लांत सारा
है कोई नेपथ्य में
जो लिख रहा है वृत्तान्त सारा

पूर्ण न होता मनोरथ
दीप भी कितने जले
कुछ दिये तो बुझ गये
बस कुछ दिये पथ पर चले

तिमिर रातें छँट पड़ेगी
उठ पड़ेगी निशांत धारा
है कोई नेपथ्य में 
जो लिख रहा है वृत्तान्त सारा..!

✍️
कविराज' दिग्विजय सिंह
शिक्षक-प्रा०वि० दलपतपुर
    जनपद-गोंडा

4 comments:

  1. क्या बात है कविराज दिग्विजय जी

    बहुत ही शानदार रचना । आपने जीवन को बहुत ही कम शब्दों में ही विस्तृत वर्णन किया है।

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  2. jeevan ki yathart ka bodh karane ke liye kaviraj Digvijay Singh ka bahut bahut abhar aise hi rachana karke hum shikshk sathiyon ka manoranjan , gyanvardhan karte rahe

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