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मां.....पाती प्रेम भरी

 मां.....पाती प्रेम भरी 💞

मां..तुम पाती प्रेम भरी रहना ....
चलना सिखलाती ,
खुद से खुद की पहचान कराती,
सही गलत का फर्क बताती,
दुनिया दिखलाती रहना.... 
मां.. तुम पाती प्रेम भरी रहना..
सपनों में मीठी सी थपकी देती,
प्यारी सी मुस्कान दिखाती ,
आंखों से दूर होती नींद को,
लोरी गा कर बुला देना,
मां.. तुम पाती प्रेम भरी रहना..
झूठे मुस्कान में छिपे दर्द को,
आंखों से पहचानती,
टूटे हृदय को छाती से लगाकर,
अंको में भर लेना,
मां.. तुम पाती प्रेम भरी रहना..
क्षमा, दया, त्याग,तपस्या,
के संस्कार सिखाती,
जीवन की कड़ी धूप में,
घने वृक्ष की छांव दिखाती रहना,
मां..तुम पाती प्रेम भरी रहना..
तारों के शहर में होकर भी,
चांदनी बन जीवन को रोशन करती,
धरती पर ईश्वर का दर्श
दिखलाती रहना,
 मां.. तुम पाती प्रेम भरी रहना..

✍️
 सुकीर्ति तिवारी
सहायक अध्यापक
कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय करहिया, जंगल कौड़िया गोरखपुर

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