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तकनीकियों पर ध्यानाकर्षण

तकनीकियों पर ध्यानाकर्षण

प्रेरणा हो चाहें निपुण हों,
 बच्चा- बच्चा प्रवीण हो।
 बच्चों की लगन बढ़ा पाएँ,
निष्ठा से दीक्षित होते जाएँ।।

संसाधनों से पूर्ण कक्षा कक्ष हो,
उचित कक्षा प्रबंधन भी हो।
शिक्षण में दिखते बहुरंग हों,
सीखना क्यों न मनभावन हो?

रोचक प्रस्तावना से प्रारम्भ हो,
टी०एल०एम० सुदंर, सुगम्य हो।
विषयानुसार गतिविधियाँ हों,
सीखने का वातावरण ऐसा रम्य हो।।

 प्रश्न पूँछो समाधान मिले,
बातचीत के जब चलें सिलसिले।
बच्चों को सही उपचार मिले,
कार्यपत्रकों पर जब उँगलियाँ चलें।।

समूह में बच्चे सीखते जाएँ,
जोड़ी में झिझक दूर कर पाएँ।
स्वयं सीखे दूसरों को सिखाएँ,
बाँटें जितना सब बढ़ते जाएँ।।

परिवेश संसाधनों से है भरपूर,
 सीखने से अब कोई रहे न दूर।
अभ्यास अवसर मिले बार- बार, 
 पुनरावृत्ति करते रहें बार- बार।। 

हर बच्चा समाज उपयोगी हो,
जब सकारात्मक प्रतिपुष्टि हो।
सीखने के लिए भ्रमण भी हो जाए,
सिखाने से संतुष्टि मिल जाए।।

सरल से कठिन की ओर बढ़ें,
सीढ़ियाँ नित एक नई चढ़ें।
प्रोजेक्ट कार्य से निष्कर्ष मिले,
सबको अपनी मंजिल मिले।।

बच्चे अनुसार तरकीबे हों,
कहीं कुछ भी न बोझिल हो।
सिखाने में प्राप्त आनंद हो,
हर विद्यालय नंदनवन हो।।

✍️
प्रतिभा भारद्वाज (स०अ०)
उ०प्रा०वि०वीरपुर छबीलगढ़ी
जवाँ, अलीगढ़

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