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आ जा तुझे गुलाल लगा दूँ इस होली में

आ जा तुझे गुलाल लगा दूँ इस होली में

दुश्मन के छक्के छुड़ा के आ जा होली में,
आ जा तुझे गुलाल लगा  दूँ इस होली में।
सरसों पक गए गेहूं पक गए अमवा गए बौराई,
पतझड़ बीता बसंत देख मनवा है हरषाई।
अम्मा तेरी राह निहारें बाबू के अंखिया पथराई,
बबुआ भैया भैया पुकारें कैसे उनका समझाई।
मुनिया कहे गुलाल लगाइब पापा को होली में,
गलवा करबे लाल लाल पापा के होली में।
भारत माँ का लाल लाल हो गया  होली में,
लाल गिरा है जा के भारत माँ की झोली में।
भारत माँ के आन के खातिर गोली खा गया सीने में,
खून की होली खेल गया शान से जीने में।
आग बरसती थी उनके हर एक गोली में,
गजब का जज्बा रहता था उनकी टोली में।
राजनीति के आकाओं की कब तक नफरत होगी बोली में,
आतंक और नफरत को जला दें इस होली में।
मैं तो तेरी राह निहारूँ अब भी होली में,
आजा तुझे गुलाल लगा दूँ इस होली में।

✍️
ब्रजेश कुमार द्विवेदी
प्रधानाध्यापक
प्राथमिक विद्यालय कोइलिहा
बलरामपुर
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