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🐦प्यासी मैना

कलरव कक्षा 4 की कहानी
भोजपुरी गीत रूप में

🐦प्यासी मैना

एगो छोटी मैना रहत रहली बगिया में
नीम के खोखल में काटे जिन्दगनिया
वो ही बगिया में एगो नल से 
दाना चुगके पियत रहली पनिया
धीरे धीरे कुछ समय तब बीत गइले
आई गईल फेर तब गरमी के दिनवा
वोही गर्मी में सूखे ताल व तलैया हो
प्यास से व्याकुल होके तड़पे चिरैया
उड़ के अमवा के पेड़वा पे जाई बैठी
तोता से पूछली कहाँ मिले पनिया।

बोलल बा तोता बा घडिलवा जमुनिया के नीचे
चल के पी लेबू पनिया जमुनिया के नीचे
मैना और तोता जब जामुन नीचे अईले
घड़ा त मिलल पर पानी नाही पईले
मिल गईल उनके कबूतर जमुनिया के नीचे

मैना कही तब पुकार सुन ल कबूतर भाय
बड़ी प्यास लागी नाही मिले पनिया ना
सुन के वचन कबूतर नीर बरसें झर झर
लाल ईंट के मकान में मिली पनिया ना
उहवा आदमी एगो आवे और कपड़ा धोवे
रुके फर्श के दरार में पनिया ना
तीनो वोही जगह गइले पर पानी नाही पवले
प्यास से टूटे लागल बदनिया ना।

मैना के आवे तब रोवाई पानी मिली न भाई
मैना के संग संग तोता औ कबूतर भटकन लागे इधर उधर 
थक हार रहे बिलखाई पानी मिली न भाई
कुछ देर बाद पीपल नियरे आये
चिर्र चिर्र चहकत गौरैया के पाये
लगे जाके बोलल बा कबूतर पानी मिली किधर

गौरैया कहे तब लागल तोहके प्यास बा लागल
हम नहाके अइली खूब पनिया में 
मैना दुखड़ा आपन रोई  सुध बुध देहली खोई
बहिनी हमके बतावा जहाँ मिली पनिया ना।

ले के गयी संग संग गौरैया
वोही घर के अंगनवा
सुंदर सुंदर फूल खिले रहले
हरे भरे पौधे भी उगल रहले
मिट्टी के कुंडा में रखल पनिया
वोही घर के अंगनवा

तोता बोला इस बार पानी मिल गया यार 
कुंडे में भरल बाड़े पनिया ना
एक गिलहरी भी रहले हुदहुद पानी पियत रहले
पूछलस मैना के रखले बाड़े पनिया ना
गौरैया बोली तब भाय छोटी लइकी एक बाय
रोज रोज कुंडे में भरे पनिया ना

तीनों कुंडा लगे गइले जी भरके पानी पियले 
समझा केतना मोल बाड़े पनिया ना
कीमत पानी के बुझाइल कि ना समझ आइल
समझावे दीपक कह वचनिया ना
अब से पानी खूब बचईहा पशु पक्षी सेवा करिहा 
इंसानियत से ही जाने दुनिया ना।

रचयिता
दीपक कुमार यादव (स•अ•)
प्रा वि मासडीह
विकास खण्ड महसी
जनपद बहराइच
मोबाइल-
9956521700

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