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अंतर्ध्वनि

हृदय में गूंजित अनहद नाद
बढ़ाता है प्रतिपल आह्लाद
मनुज रे! अंतर्ध्वनि पहचान
मिटा ले मन के सकल विषाद
© पुष्पेन्द्र यादव

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