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शिक्षक की बगिया

इस दुनिया में प्रत्येक प्राणी सदैव सुन्दरता के प्रति आकर्षित रहा है । जहाँ कवियों ने चाँद-तारों की सुन्दरता को निहार कर अनेक कविताओं की रचना की। वहीं भक्तों ने अपने भगवान की सुन्दरता पर मंत्र मुग्ध हो आराधना को आत्मसात किया। लेकिन हम एक दिन बिजली की बेचैन व्यवस्था से और पक्के घरों की गर्मी से आहत होकर अपने गाँव के ही बगिया वाले चाचा की बगिया में गर्मी से राहत पाने के लिए पहुंच गये। यह सोचकर कि नहर में अभी दो दिन पहले ही पानी आया है तो बगिया में सिंचाई हो गयी होगी और वहाँ ठंडक का सुखद अहसास जरूर मिलेगा।

जब बगिया में पहुँचा तो वहाँ का सुन्दर दृश्य देख सुन्दरता का सच्चा, हृदय स्पर्शी और प्रत्यक्ष दर्शन होने लगा। इधर हम चुप चाप बगिया के हरे भरे पौधों और उनके फूलों की सुन्दरता देख कर गर्मी की पीड़ा को भुला रहा था उधर बगिया वाले चाचा किसी के आने की खबर से बेखबर बेहद प्रसन्न भाव से पौधों की निराई-गुड़ाई करते हुए गुन गुना रहे थे कि - "आज मेरी बगिया में आयी फूलों की बहार हो।" इसके बाद कभी इस फूल को स्पर्श करते कभी उस फूल की खुशबू का अहसास करते हुए अपनी वास्तविक दुनिया में विलीन थे। जब हमने बगिया के पौधों की हरियाली और फूलों की मन्द-मन्द खुशबू के बीच बगिया वाले चाचा की स्वाभाविक प्रसन्नता और बगिया की हरी भरी सुन्दरता के आनन्द सागर में गोता लगाते देखा तो सहसा हमारा मन अपनी बगिया की ओर चला गया  और सोचने लगा कि एक माली और शिक्षक में कितनी समानता है?



जहाँ माली की बगिया में निराई-गुड़ाई और सिंचाई के बाद सुन्दर पौधों पर सजे पुष्प और फल देख कर माली, दुनिया की सुन्दरता का सुखद अहसास करता हैं। वहीं एक शिक्षक भी विद्यालय रूपी बगिया में पढ़ाई-लिखाई और प्रेरणा द्वारा कक्षा के बच्चा रूपी विभिन्न रंगों के फूलों के संस्कारों को सजाते, सम्हालते हुए सुन्दरता का सुखद अहसास करता है। क्योंकि फूल और बच्चे इस प्रकृति में सबसे सुन्दर परमात्मा द्वारा प्रदान की गई निधियां है। जिनकी सेवा और संगत का सुखद अवसर परमात्मा की कृपा से हम शिक्षकों को भी मिला है।

अगर इस सौभाग्य का परीक्षण करना हो तो उस व्यक्ति या परिवार से मिलें। जिसके घर में कोई बच्चा न हो और बच्चों से दूर रहता हो। ऐसे व्यक्ति की बेदना को सुनकर आपको अपने शिक्षक होने पर सुखद अहसास होगा  और यदि ऐसे घर में सौभाग्य से एक बच्चा आ जाये तो उस घर परिवार की अनेक खुशियों के साथ जीवन शैली ही बदल जाती है। लेकिन हम एक नहीं, अनेक बच्चों के गुरु, शिक्षक और मित्र होने के सौभाग्य शाली व्यक्ति हैं  और एक शिक्षक को विद्यालय के बच्चों का प्रेम और उनका संग जो सुखद अनुभव कराता है। वह सुख शायद किसी धन और वैभव शाली व्यक्ति को अनेक प्रयासों के बाद भी न मिल सके। जो हमें धन और धर्म के साथ प्राप्त है। 

कई बार घर से अस्वस्थता का अनुभव करते हुए विद्यालय पहुंचते हैं। लेकिन विद्यालय में बच्चों के बीच पहुँचते ही सब कुछ परेशानी भूल कर बालमय हो जाते हैं। जैसे आज भीषण गर्मी की बेदना को चाचा की बगिया में आकर पेड़ पौधों और फूलों की सुन्दरता और संगत में आकर भूल गया। जहाँ शिक्षक की बगिया का नया अनुभव आत्मसात हुआ, जिसे आप लोग विद्यालय कहते हैं।



लेखक :
विमल कुमार
प्राथमिक शिक्षक
कानपुर ( देहात )

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