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किताबें

किताबें

किताबें हमारी ज़िंदगी का हिस्सा है,
कभी सुना,कभी अनसुना किस्सा है।
ऋग्वेद प्राचीन गाथा है,
पुस्तकों से पुराना नाता है।
भुतल जाने कितने पंथ है,
प्रमाण जिनका ग्रन्थ है।
ये मानव इतिहास बताता है,
पोथी,बही खाता है।
सार्थक किताबें गागर में सागर हैं,
तभी कहलाते विद्यासागर हैं।
आजीवन किताबों से हमारा रिश्ता है,
मनुष्य वही सफल है,जो सदा
किताबों से कुछ ना कुछ सीखता है।
किताबें सखा-सहोदर हर रिश्ते से प्यारा है,
जो यह समझे उसका जीवन न्यारा है।

✍️
नुतन शाही, स०अ०
प्रा०वि०बेलवार,खोराबार 
      गोरखपुर

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