गज़ल छत न दीवार न सहारा हूं। सबूत क्या दूं मैं तुम्हारा हूं।। एक की बात हो तो बतलाऊं, हजारों खंजरों का मारा हूं।। पोछ कर आंसू मुस्करा के कहा...Read More
गज़ल
Reviewed by Ram krishna mishra
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फ़रवरी 15, 2021
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इंसान के गुरूर का अंजाम ही तो है, हर ओर आज देखिए कोहराम ही तो है| मायूसियों के दौर में संयम नियम रहे, कुदरत ने दे दिया हमें पैगाम ही तो है| ...Read More
गज़ल
Reviewed by Ram krishna mishra
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अप्रैल 23, 2020
Rating: 5