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M.D.M का सोशल आडिट

पिछले चार वर्षों से नियुक्त हेडमास्टर मैडम ने रोज की तरह  विद्यालय समय से खोला, बच्चे और चार महीने पहले ही पहली बार विद्यालय को प्राप्त तीन समायोजित शिक्षिकायें भी उपस्थित दिखाई दे रही थी | थोड़ी देर में सफाईकर्मी आकर साफ- सफाई में व्यस्त हो गया |
      प्रार्थना की घंटी का संकेत पाकर विद्यालय की बाल संसद ने सभी बच्चों को पंक्तिबद्ध किया, एक्टिव स्कूल की गतिविधियों के बाद पहला पीरियड शुरू हो गया |
       एक घण्टे बाद हेडमास्टर मैडम का फोन घनघना उठा, कार्यालय में किसी विशेष सूचना के लिए बुलाया गया था , छुट्टी के बाद जब हेडमास्टर कार्यालय पहुँची तो बताया गया कि M.D.M के अधिकारियों की एक टीम विद्यालय में सोशल आडिट करायेगी जिसमें जनता से M.D.M योजना के बारे में सीधा संवाद होगा और मूल्यांकन किया जायेगा, गाँव के दो लोग प्रतिनिधि के रूप में चुनकर प्रशिक्षित किये जायेंगे जो कि मध्यस्थ का काम करेंगे | इस सारी प्रक्रिया की टीम द्वारा वीडियोग्राफी भी की जायेगी जो कि देखकर M.D.M प्राधिकरण और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समीक्षा के साथ ही हेडमास्टर के विरुद्ध कार्यवाही तय करेंगे | पूछने पर मालूम हुआ कि उ० प्र० के दो जिलों में मध्यान्ह भोजन योजना का प्रदर्शन खराब रहा है अतः इनमें ये आडिट कराये जायेंगे |
        दूसरे दिन हेडमास्टर मैडम द्वारा ग्राम प्रधान, कोटेदार, अभिभावकों, वि०प्र० समिति के सदस्यों, आँगनबाड़ी कार्यकर्ती और गाँव की जनता तक विद्यालय मे M.D.M के सोशल आडिट के दिनाँक व समय की सूचना लिखित और मौखिक दोनों तरह से भिजवा दी गई, साथ ही समाचार पत्र में भी आडिट होने की सूचना थी |
       वो दिन आया जब विद्यालय में सोशल आडिट होना था, मध्यान्ह भोजन के अधिकारियों की टीम विद्यालय पहुँच चुकी थी, टीम ने पूरे विद्यालय की बड़ी गहनता से जाँच की , सारे अभिलेख , शिक्षण कार्य, रसोई- भंडारगृह, शौचालय आदि सबकी जाँच की और फोटोग्राफी भी की , साथ ही  हेडमास्टर मैडम के प्रयास की सराहना भी की |
        आडिट होने का समय एक घण्टे से ज्यादा बीत चुका था, ग्राम प्रधान, बी०डी०सी० और दो अभिभावक मात्र उपस्थित थे जो कि आडिट के लिए पर्याप्त नही थे | अधिकारियों के निर्देश पर बच्चों को घर भेजकर अभिभावकों को बुलाया गया, थोड़ी देर बाद पच्चीस- तीस अभिभावक उपस्थित हुए हालांकि चयनित दो प्रतिनिधियों और कोटेदार का अब भी कहीं अता-पता नही था |
        आडिट शुरू हुआ , जाँच अधिकारी ने उपस्थित जन समूह से विद्यालय की कार्यप्रणाली और योजनाओं के क्रियांवयन के बारे में कई प्रश्न किया , सभी के उत्तर सकारात्मक ही मिले | विद्यालय के नामांकित बच्चों की तुलना में कम रसोइयों के चयन के बारे में मात्र दो ही आवेदन दिये जाने  पर जन समूह से पूछा गया तो जवाब मिला कि विद्यालय से तो हमेशा आवेदन मांगे जाते हैं एक दो बार दो से ज्यादा लोगों का चयन करके नाम भी भेजे गये लेकिन मानदेय सिर्फ दो रसोइयों का आता रहा , बस इसलिए अब आवेदन ही नही किया जाता |  जाँच अधिकारी ने कहा -" आप सब विद्यालय को सहयोग कर दिया करिये, ये सेवा कार्य है, मानदेय कभी न कभी तो आयेगा ही"| इस पर जनसमूह से आवाज आई - " बिना रूपये के कौन काम करेगा, हम तो गरीब आदमी हैं , दो रोटी के लिए ही काम करते हैं साहब"  | सुनकर जाँच अधिकारी का चेहरा तमतमा गया था |   
         रसोइयों से पूछताछ की बारी आई, सवालों के उत्तर में उन्होंने बताया कि भोजन तैयार होने के बाद पहले रसोइयों और हेडमास्टर द्वारा चख लिया जाता है फिर उसके बाद बच्चों का हाथ साबुन से धुलवाकर भोजन परोसा जाता है, उपस्थित जन समूह ने जाँच अधिकारी द्वारा विद्यालय में मध्यान्ह भोजन से संबंधित किसी तरह की कोई दुर्घटना होने के लिए पूछने पर जवाब में नही कहकर कोई दुर्घटना होने से इंकार किया | रसोइयों ने आगे बताया कि कभी मध्यान्ह भोजन से संबंधित किसी प्रकार की ट्रेनिंग भी उन्हे नही दी गई है,  मध्यान्ह भोजन ग्राम प्रधान द्वारा बनवाया जाता है वो महीने भर का राशन विद्यालय में रख देते हैं लेकिन कभी राशन तौलकर नही देते | प्रधान ने अपनी सफाई में कहा कि उसे ही कोटेदार कभी राशन तौलकर नही देता, जन समूह ने भी बताया कि कोटेदार अपने काम में बहुत घालमेल करता है , इसके कारण कई बार निलम्बित भी हुआ| बच्चों से पूछनें पर विद्यालय में किसी तरह के भेदभाव न किये जाने की बात सामने आई थी|  मध्यान्ह भोजन से संबंधित सबको किसी तरह की ट्रेनिंग न  मिलने की बात पर ग्राम प्रधान और हेडमास्टर ने असंतोष जताया |
         आडिट की सारी प्रक्रिया बहुत शांति और सुचारु रुप से चल रही थी फिर भी जाँच अधिकारी के चेहरे पर बेचैनी दिखाई दे रही थी , तभी पत्रकार का आगमन हुआ और जाँच अधिकारी की सक्रियता बढ़ गई, दनादन जनसमूह से एक के बाद एक ऐसे अंदाज में प्रश्न पूछने लगे कि जन समूह की समझ में ही नही आ रहा था कि कब और किसका क्या जवाब दे , बहरहाल पत्रकार को नोट करने का इशारा करते हुए जाँच अधिकारी बोले कि ये गाँव बहुत खराब है और हेडमास्टर का काम भी बहुत खराब है  | सोशल आडिट खत्म हो चुका था तभी कोटेदार आया और कुछ जाँच अधिकारी से बात करके चला गया, उसी के थोड़ी देर बाद जाँच अधिकारी अपनी टीम के साथ भुनभनाते हुए विद्यालय से रवाना हो गये |  
-----  निरुपमा मिश्रा
    

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