ठण्डी आई Ram krishna mishraदिसंबर 25, 2025ठण्डी आई दिनकर का रथ रुक-रुक कर, क्यों आता है, बादल अब छुप-छुप-छुप कर, क्यों आता है। कोहरे की चादर ओढ़े किरणें आईं, सजग रहो ठण्डी आई-ठण्डी आई...Read More
आदमी या रोबोट Ram krishna mishraदिसंबर 05, 2025आदमी या रोबोट ___________________ अब न सुबह होती है, और न शाम होती है, बस,सिर पर दहकता , शासनादेशों का सूरज, बेसिक के आंगन में , अब परछाई...Read More