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मत छीनो मेरा बचपन

मत छीनो मेरा बचपन,
मुझे खुली हवा में जीने दो।
बस्ते को मत बोझ बनाओ,
खेल-खेल में सीखें दो।
नन्हें-नन्हें पर हैं मेरे,
आसमान में उड़ने दो।
घर में प्यार मिले माँ का,
पापा से ज़िद्द करने दो।
स्कूल लगे एक बगिया सा,
मस्त बयार में खिलने दो।
कक्षा में जो पाठ पढ़ें,
जीवन में उसको ढलने दो।
भय न लगे, डर दूर रहे,
ऐसी शिक्षा मिलने दो।
स्वस्थ रहे तन, मन मुदित रहे,
नित पौधे सा मुझे बढ़ने दो।
फूलों सा महके ये बचपन,
रंग इंद्रधनुष से भरने दो।
वीर शिवाजी और प्रताप सा,
इस जीवन को बनने दो।
चाचा नेहरू के सपनों को,
पूरा मुझको करने दो।
मत छीनो मेरा बचपन,
मुझे खुली हवा में जीने दो।

लेखिका
कविता तिवारी
प्रा0वि0 गाजीपुर (प्रथम),
विकास खण्ड-बहुआ,
जनपद फतेहपुर।
 
 

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