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मैं सिर्फ एक विद्यालय नही हूँ

दीप हूँ मैं
मैं एक पुंज हूँ
छाँव हूँ मैं
मैं ज्ञान का निकुंज हूँ
मैं तुम्हारे हक़ के लिए समर्पित हूँ
मैं तुम्हारी जीत से ही स्पंदित हूँ
जहाँ है तुम्हारी खुशियां
जहाँ तुम्हारे हक़ की बात है
जहाँ है दिन तुम्हारे उजालो के
जहाँ एक सुकून भरी रात है

ज़िन्दगी की राहो में जब आगे बढ़ जाना
राह है, थोड़े तो थकोगे, तो रुक जाना
पलट के देखना अपनी आदतों में
खोजना मुझे तुम्हारी राहतों में
हर डगर , हर पथ पर मैं हूँ
जहाँ होगे तुम, मैं बस वहीं हूँ
हमसफ़र हूँ तुम्हारा..
मैं सिर्फ एक विद्यालय नहीं हूँ



✍  रचनाकार
    यशोदेव रॉय
     पूर्व माध्यमिक विद्यालय नाउरदेउर
     कौड़ीराम
     जनपद - गोरखपुर

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