Breaking News

मन में आया कह डालूँ

 मन में आया कह डालूँ

लेनी है अगर हम शिक्षकों से टेट परीक्षा,
इतने काम हमसे सरकार क्यों करा रहे?
जलें हम दीपक बन ज्ञान का प्रकाश करें।

हम जलाएं चूल्हें स्कूल में बच्चों को पढ़ाएं।
घर से अभिभावक को समझाकर बच्चे लाएं।
गाँव,गली,मुहल्ले टोले सन्देश बाँटने हम जाएं।
डुग्गी मुनादी जैसे हो शिक्षक  फ़रियादी कराएं।
ड्रेस में आओ बच्चों, बच्चों को रोज समझाएं।
अभिभावक को जब समझाएं खर्च वो चलाएं।
राशन बंद होने देने पर वो भी धमकी ही सुनाएं।

हमीं सुरक्षाकर्मी,दमकलकर्मी,
सफाईकर्मी बन जाएं।
नौकर बन शिक्षक कुर्सी मेज भी अपने सजाएं।
हर कमरे की साफ़-सफ़ाई,
रंग-रोगन भी शिक्षक करवाएं।
बिजली सौर ऊर्जा के सामानों की सुरक्षा कराएं।
स्मार्ट क्लास,टी.वी.,प्रोजेक्टर माध्यम ढेरों बन जाएं।

इंसान हैं शिक्षक,जो अबोध बच्चों को कलम पकड़ना सिखाएं।
मोबाइल से होते जो असिसमेंट इक़-इक़ बच्चों से शिक्षक करवाएं।
कितने भी यहाँ तकनीक या बनें रोबोट भी आते जाएं,
पर इक़ शिक्षक इंसानी भावना ये मशीनरी कर हैं पाएं?

कोई शिक्षक वो है जो रोबोटों को बनाएं, सिखाएं।
रोबोट सेल जब बंद हुआ उसके काम समाप्त हो जाएं।
ग़र हुआ ख़राब जब रोबोट कहीं गला ही ना दबाए।
 ऐसा नहीं हो मुझसे होश रहे, गारंटी शिक्षक ही लाएं।

हर वक्त पर हुई हमारी परीक्षा हम मैदानों से नहीं हैं भागते यहाँ तक आएं।
केंद्रीय कर्मचारियों जैसे पद के लिए प्रशिक्षण दें,बिना प्रशिक्षण हम बेसिक में नहीं आएं।

जबसे नियुक्त तबसे हम अपना समय आपके आदेशों के तहत अनगिनत काम करते हुए बिताये।
अब भी जनगणना में शिक्षक घर-घर जाकर शिक्षा-दीक्षा चौपट करवाएं।
नित नये फ़रमान के दबाव में आकर शिक्षक मर जाएं।
जबसे नियुक्ति हुई तबसे सेवा दिए,अब हम बेकार कहलायें। 

जब चयनित हुए तब ये आदेश नहीं बने थे,तब काहे ऐसे करार  कराएं?
किसकी सलाह से आप हैं बनाएं ? जो अब हटाएं,हम जिएं या मर जाएं?

✍️
रीता गौतम (प्रधानाध्यापिका)
प्राथमिक विद्यालय अशरफ़पुर 
विकास खंड-भटहट 
जनपद-गोरखपुर

कोई टिप्पणी नहीं