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एक विनती माँ से


पूजन अर्चन वंदन है नित भक्त सभी अब मात पुकारें

रिद्धि व सिद्धि प्रदायक माँ करके किरपा मम द्वार पधारें

प्रेम प्रकाश यहाँ बिखरे सबके मन-मंदिर दीपक बारें

मानव रक्त पिपाषु बना उसके अब तो सब कर्म सुधारें

लेखक
निर्दोष कान्तेय

काव्य -: मत्तगयन्द सवैया
शिल्प -: 7 भगण+गुरु गुरु, चार पद, 23 वर्ण प्रत्येक पद में।
{(2+1+1)7+ 2+2}4

3 comments:

  1. बिलकुल गणितीय है भैया?
    ह्ह्ह्ह


    दो चार लाइन में इसकी गुणा गाँठ भी समझा दिया करिए तो हम लोग कॉपी ही जोड़ के जांच दिया करेंगे।


    ह्ह्ह्ह

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  2. मानव रक्त पिपाषु बना उसके अब तो सब कर्म सुधारें
    .
    क्या बात है ND भाई..... वाह.......

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  3. माँ पर अति सुंदर रचना ।

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