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वर्णमाला गीत


चिंता ता ता चिता चिता चिंता ता ता ता।
चिंता ता ता चिता चिता चिंता ता ता ता।
दुनिया चले अगाड़ी तो मैं चलूं पिछाड़ी।
सब खेल जनता हूं मैं हूं बड़ा खिलाड़ी।
स्कूल ले के जाऊं सबको मैं सिखाऊं।

क्या

चिंता ता ता चिता चिता चिंता ता ता ता।
चिंता ता ता चिता चिता चिंता ता ता ता।
क से कलम को चलाऊँ, ख से खाना भी खिलाऊँ।
ग से गमले को लेकर घ से घर को सजाऊँ।
कोई करे बहाना  ड़  से  ठेंगा उसे दिखाऊं।

क्या

चिंता ता ता________
च से चरखे को चलाऊँ, छ   से छाता को लगाऊँ।
ज से जहाज को उड़ाकर ,झ से झंडा को फहराउं।
कोई करे बहाना  ञ  से  ठेंगा उसे दिखाऊं।

क्या

चिंता ता ता________
ट से टमाटर को देकर  ठ से ठठेरे से बर्तन बनवाऊं, ड से डलिया में ले के सब्जी ढ से ढपली को बजाऊं।
कोई करे बहाना ण से ठेंगा उसे दिखाऊँ।

क्या

चिंता ता ता_______
त से तकली को नचाकर,थ से थाली ले आऊं।
द से दादी को सुनाके किस्सा , ध से धन खूब कमाऊं।
कोई करे बहाना न से नल से नहलाऊं।

क्या 

चिंता ता ता________
चुपके से चोरी चोरी बाँधू प से पतंग की डोरी,फ से फल को ले आऊं , भ से भैया को खिलाऊँ।
ब से बाबा जो मांगे पानी दौड के पिलाऊँ,म से मामा जो मांगे पानी ठेंगा उन्हें दिखाऊँ।

क्या
चिता ता ता_________
ऐसा चलाऊँ चक्कर य से यमराज भी हो घनचक्कर,र से रायता खिलाऊँ, ल से लट्टू नचाऊं, व से वक जो मांगे मछली श से शलजम उसे खिलाऊँ, ष से षटकोण को बनाकर स से सरपट दौड़ के ह से हवा में उड़ाऊँ

क्या
चिंता ता ता_______
क्ष से क्षत्रिय जो लड़ने जाएं, त्र से त्रिशूल भी ले जाएं ,ज्ञ से ज्ञानी जो ज्ञान  दे न पाए
स्कूल ले के जाऊं उनको भी मैं सिखाऊँ।

क्या
चिंता ता ता चिता चिता चिंता ता ता ता।
चिंता ता ता चिता चिता चिंता ता ता ता।।

✍️रचयिता
ब्रजेश कुमार द्विवेदी
प्राथमिक विद्यालय हृदयनगर
जनपद- बलरामपुर

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