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अभी मैं बच्चा हूँ

छ: वर्षीय सर्वेश का दाखिला कराने के लिए मास्टर जी जब उसके घर जाते हैं, तो उनको देखते ही वह मां की ओर मुखातिब हो कहता है.......

माँ !
अभी मैं बच्चा हूं
तन और मन का कच्चा हूँ
पढ़ना नहीं, खेलना मुझको
धूल में सनना अच्छा लगता है

मिट्टी की सोंधी सुगंध में
पूरा जीवन छुपा हुआ है
जनना, मिटना इस मिट्टी में
सम्पूर्णता व संस्कार छिपा है।

मेरे कन्धे नाजुक हैं
ज्ञान का बस्ता मत ढोने दो
खेल खेल में मैं भी पढ़ूंगा
स्वस्थ और परिपुष्ट बनूंगा 
स्वस्थ और बलवान कांत में
पौरूष व सामर्थ्य छिपा है।
माँ!
अभी मैं बच्चा हूँ....

डॉ०अनिल गुप्ता
प्रधानाध्यापक
प्राoविoलमती
विकास खंड-बांसगांव
जनपद-गोरखपुर


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