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नवाचार या अत्याचार

एक दिन की बात है करीब 11 बजे होंगे राम  सेवक मास्टर साहब बच्चों को गणित पढ़ा रहे थे। तभी एक फोर व्हीलर आकर रुकी जिसमे 3 जीन्स शर्ट पहने लड़के व 2 स्मार्ट लड़कियां उतरीं। मास्टर साहब सकपकाए तुरन्त उन लोगों को आदर पूर्वक बैठाकर चाय के लिए रसोइया से बोले , तब तक एक लड़की ने पूछा मास्टर साहब क्या पढ़ा रहे है मास्टर साहब ने बताया भिन्न पढ़ा रहे है तो लड़की ने कहा अरे ये क्या, आप  तो पुरानी विधि से पढ़ा रहे है  इसमें  कोई नवाचार नही है । ये हमारा नवाचार है इस नवाचार से पढाईये और 15 दिन बाद हम सब फिर से आएंगे और इसका हमे रिजल्ट चाहिए इसे मंत्री महोदय को देना है। मास्टर साहब कभी bsa साहब के पास तक तो गये नही थे  मंत्री जी का नाम सुनकर ही पूरे शरीर मे सिहरन सी फैल गयी ।मास्टर साहब का बेसिक में 25 बरसों को अनुभव था बड़े लगन से बच्चों को पढ़ाते थे। बच्चे भी खुश थे मास्टर साहब भी।

लेकिन आज नवाचार को देखकर हैरान थे क्या करें  कैसे पढाये 15 दिन का समय है यदि बच्चे भिन्न न लगा पाए तो मेरा क्या होगा एक डर मन मे बैठ गया   आंखों के सामने आपने बच्चों का चेहरा दिखाई देने लगा बड़ा लड़का इंजीनियरिंग कर रहा है उसके लिए एजुकेशन लोन लिए है उसका emi कट रहा है एक घर लोन लेकर बनवाये है उसका emi हर महीने कट रहा है  यदि वेतन रुक गया तो घर का सारा काम रुक जाएगा ।

 घर आये तो पत्नीजी से बताना नही चाह रहे थे लेकिन पत्नी तो पत्नी होती है गिरा चेहरा देख कर पूछ लिया आखिर हुआ क्या है क्यो मुँह गिराए बैठे है  तो मास्टर साहब ने सारी बाते बतायी तो पत्नी भी तुनक कर बोली मैं तो आप से कह रही थी ये मास्टरी न करो वो देखो शर्मा जी को आप के साथ ही सेक्रेटरी हुए थे  आज देखो उनके पास बंगला है गाड़ी है लखनऊ में मकान है आप के पास क्या है एक घर वो भी emi पर अब और करो मास्टरी । मास्टर साहब चुपचाप सुनते रहे और रोज नाच कूद कर बच्चों को पढ़ाने लगे न तो उनके समझ मे आता न तो बच्चों के 15 वें दिन फिर गाड़ी आकर रुकी मास्टर साहब डरे सहमे थे कि क्या जबाव देंगे लेकिन उसमें से एक भला आदमी निकला  बोला , मास्टर साहब ,आप क्यों डर रहे है आपने तो बहुत अच्छा सिखाया है ये है टेस्ट पेपर इसे हम सब कम्प्लीट कर रहे है बस आप साइन कर दीजिए।मास्टर साहब को थोड़ा सुकून मिला और जल्दी जल्दी साइन किये और वे सब चले गये। 10 दिन बाद bsa साहब का फोन आया बधाई हो  आपने जो नवाचार किया है उसके लिए माननीय मंत्री जी द्वारा आपको सम्मानित किया जाएगा। मास्टर साहब का दिमाग चकराया। लेकिन  bsa साहब का आदेश था तो मानना ही था ।उधर बधाई का दौर शुरू हो चुका था हर कोई मास्टर साहब को नमस्ते कर रहा था। मास्टर साहब भी इस बढ़ी हुई इज्जत से काफी खुश थे। 
  मंत्री जी के हाथों एक कागज को टुकड़ा पाकर लौटे तो बधाइयां ही बधाइयां।

   रात में जब खाना खाकर लेटे तो सोचने लगे कि ये क्या हो गया जिसे 15 दिन में न मैं समझ पाया और न तो बच्चों को समझा पाया उसके लिए मुझे इतना बड़ा तमग़ा मिला तो 25 वर्षों से जो मैं समझ रहा था और बच्चों को समझा रहा था  वो क्या था हमारे पढाये कितने बच्चे टीचर है ,पुलिस है, दरोगा है कमांडेंट है यहां तक कि वर्माजी का बेटा तो कर्नाटक में जिलाधिकारी है तो उनको भी तो मैंने ही पढ़ाया था आज ये कौन सा नवाचार आ गया है।सोच ही रहे थे कि पत्नी की आवाज आई सो जाइये सुबह स्कूल जाना है । ___________________;;;;
मित्रों ये तो एक बानगी है आज बेसिक की गिरती शिक्षा व्यवस्था के लिए ngo और ngo के नवाचार बहुत बड़े जिम्मेदार है। और सब बेसिक को आसमान पर पहुंचाने का सपना शासन को दिखा कर आते है और टीचरों से अधिकारी का डर दिखाकर गलत रिपोर्ट बनवाकर सबसे बड़ा नवाचारी बनते है।वही टीचर जब विभाग को रिपोर्ट बनाकर देता है टीचर नकारा है और वही टीचर जब ngo को रिपोर्ट बना कर देता है तो बहुत काबिल । ऐसा क्यों आज बेसिक में इतने ngo काम कर रहे है कि टीचर परेशान है कि किसका नवाचार लागू करे अरविंदो सोसाइटी का, प्रथम का, पिरामल का, लैंग्वेज लर्निंग का hcl का, अगसत्या फाउंडेशन का, आदि ,आदि, आदि यहां तक कि नाम ही गिनाना मुश्किल है।
  मित्रो बेसिक का नुकसान प्राइवेट स्कूल उतना नही कर रहे है जितना ये ngo कर रहे है।  प्राइवेट स्कूल तो बाहर से आपका नुकसान करते है और ये ngo अंदर घुसकर आपका नुकसान कर रहे है सरकार से मोटी रकम लेकर बेसिक को आसमान पर पहुंचाने का सपना दिखाकर आते है और हमसे आपसे अधिकारी का डर दिखाकर गलत रिपोर्ट बनवाते है और ले जाकर दिखाते है कि देखिये हमने किया हमने बेसिक को आसमान पर पहुँचा दिया ।

मित्रों हम भी नवाचार के समर्थक है लेकिन नवाचार की भी सीमा होती है। हमारी पारम्परिक शिक्षण पद्धति तब भी सफल थी आज भी सफल है नवाचार, दाल चावल रोटी सब्जी के साथ अचार के समान है टेस्टी तो है लेकिन ज्यादा नुकसान करेगा ।उसी प्रकार नवाचार करिये लेकिन दिन भर नवाचार ही न करते रहिए की नवाचार अत्याचार बन जाये।
समाज को बदलने के लिए शिक्षक पर भरोसा करना पड़ेगा- चाणक्य


ब्रजेश कुमार द्विवेदी
प्रधानाध्यापक
प्राथमिक विद्यालय हृदयनगर बलरामपुर



      
               

4 comments:

  1. बहुत सुंदर लेखन। वर्तमान शिक्षण व्यवस्था पर करारी चोट।
    धन्यवाद भैया

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  2. बहुत अच्छा भाई। सरकार नित नई संस्था से ही हमारा मूल्यांकन कर रही है और मानवीय मूल्यों को भूलकर यांत्रिक बनाने का प्रयास कर रही है।

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  3. वास्तविकता तो यही है।

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