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यहां खिलते हैं ज्ञान के फूल

यहां खिलते हैं ज्ञान के फूल


बड़ा प्यारा है अपना स्कूल
यहां खिलते हैं ज्ञान के फूल
बड़ा प्यारा है अपना स्कूल
यहां खिलते हैं ज्ञान के फूल
मैं जाता हूं अपने स्कूल 


वहां खिलते हैं ज्ञान के फूल
बड़ा प्यारा है अपना स्कूल
यहां खिलते हैं ज्ञान के फूल
मेरे स्कूल में मिलता है खाना
होता डांस और होता है गाना
मेरी मैडम है प्यार से पढ़ाती
कभी हम पर छड़ी ना उठाती
यूज़ करती है नए नए टूल
बड़ा प्यारा है अपना स्कूल 


यहां खिलते हैं ज्ञान के फूल
मैं जाता हूं अपने स्कूल
वहां खिलते हैं ज्ञान के फूल
खाना भंडारी बढ़िया बनाती
बर्तन साबुन से धोकर पकाती
बड़े प्यार से हमको खिलाती
सब रहते यहां हैं कूल
बड़ा प्यारा है अपना स्कूल 


यहां खिलते हैं ज्ञान के फूल
मैं जाता हूं अपने स्कूल
वहां खिलते हैं ज्ञान के फूल
सर हमको कहानी सुनाते
कभी शेर कभी बंदर बन जाते
खुद हँसते और हमको हंसाते
मैं कैसे जाऊं सब ये भूल
बड़ा प्यारा है अपना स्कूल 


यहां खिलते हैं ज्ञान के फूल
मैं जाता हूं अपने स्कूल
वहां खिलते हैं ज्ञान के फूल
सुबह मॉनिटर जब ड्रम बजाते
तब तैयार हम हो जाते
फॉलो करते है सारे रूल
बड़ा प्यारा है अपना स्कूल 


यहां खिलते हैं ज्ञान के फूल
मैं जाता हूं अपने स्कूल
वहां खिलते हैं ज्ञान के फूल
बड़ा प्यारा है अपना स्कूल
यहां खिलते हैं ज्ञान के फूल


✍  गीत लेखक
     अनुराग कुमार मिश्र
      प्रधानाध्यापक
      प्रा0वि0 मुबारकपुर
      खैराबाद, सीतापुर

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