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मिल कर लें शपथ

हिन्दुस्तान की साख में गुस्ताखी कर रहे,
खुद को हम मजहब में बांट रहे।
न कोई धर्म न कोई मजहब की सीख है,
ये वोटों के सौदागर हमे भरमा रहे।।


एक वाकया कहता हूँ सुनना गौर से,
इत्तफाकन दो बच्चे बदल गये अस्पताल से।
रहीम का बच्चा पला राम के यहाँ,
राम का बच्चा पला रहीम के यहाँ।।


कुछ साल बाद जब मिला उनसे मैं,
रहीम के बच्चे किया सलाम चाचा जान।
और राम के बच्चे ने किया राम राम,
जन्म से नही परवरिश से बदला धर्म है।।


थोड़ा तो देश के लिये सोच पाते अगर हम,
धर्मो के सम्बोधन से पहले जय हिंद बच्चों को सिखाते हम।
देश के युवाओं के मन मे धर्मभक्ति की नही,
देशभक्ति की जरूरत है, जिसको जगा नही पाये हम।।


स्वतंत्रता की जरूरत हमे अपने विचारों में चाहिये,
देश है सबसे पहले इसको अपनाना चाहिये।
संविधान ने दी है अनेकता में एकता,
इसे अक्षुण्ण रखने की जिम्मेवारी हमे निभानी चाहिये।।


स्वतंत्रता दिवस पर हम सब मिल कर ले शपथ,
देश को बनायेंगे उन्नत, सुदृण करेंगे विकास के पथ।
अपने अधिकारों से पहले कर्तव्यों को निभायेंगे,
कुछ भी बनने से पहले खुद को हिंदुस्तानी बनायेंगे।।




✍ रचयिता
अभिषेक द्विवेदी "खामोश"
प्राथमिक विद्यालय मंनहापुर 
सरवनखेड़ा कानपुर देहात।

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