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ग़ज़ल

ग़ज़ल
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मेरी अना का ज़रा भी जिसे ख़्याल नहीं
मुझे भी हाल पे उसके तनिक मलाल नहीं


वो अपने यार से करता है बात घण्टों तक
पर अपनी माँ को करता है एक काॅल नहीं


युँ फेसबुक पर उसके हज़ार साथी हैं
ख़ुद अपने बाप से जिसकी है बोलचाल नहीं


फँसा हुँ जाल में मैं सादगी के आ करके
तुम्हारी होंठों की लाली का ये कमाल नहीं


ख़ुदा करम ये तेरा कम नहीं है कुछ मुझपर
जवाब पास बहुत हैं मगर सवाल नहीं



✍  ज्ञानेन्द्र 'पाठक'
      स0अ0
      प्रा वि ग्वालियर ग्रण्ट 
      रेहराबाज़ार, बलरामपुर


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