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शिक्षा ही करेगी कायाकल्प


सुन-सुन मेरे भाई,
आ  गई  जुलाई ।

अब खत्म घुमाई,
शुरू करो पढ़ाई ।

सुबह  से   लेकर  शाम,
छोड़ो बच्चों सारे काम।

कॉपी और किताब तमाम,
कर लो सबका इंतजाम।

चिंकू,पिंकू,मीना, रुकसाना,
विद्या,पूजा सबको बताना।

नहीं  चलेगा  कोई  बहाना,
स्कूल पड़ेगा सबको आना।

मम्मी-पापा करें ना भूल,
बच्चे  उनके  प्यारे फूल।

जरूर भेजें उन्हें स्कूल ,
उत्थान का है यही मूल।

हर नागरिक  करे संकल्प,
पढ़ाई का न कोई विकल्प।

बचपन  है  अत्यंत  अल्प ,
शिक्षा ही करेगी कायाकल्प।

प्यारे बच्चों तुम भी सुन लो,
एक  बात  मन में  गुन लो ।

दृढ़ संकल्प का ताना बुन लो,
पढ़ाई को ही साथी चुन लो ।

हो जाओ  तुम सब  तैयार,
हर बाधा को कर के  पार।

शिक्षा को बनाओ हथियार,
तभी होगा सबका  उद्धार ।

पढ़ लिख कर आगे आएंगे,
सुशिक्षित समाज बनाएंगे।

हर  बुराई  को दूर भगाएंगे ,
सबको  सम्मान  दिलाएंगे ।

हर बच्चा नेक इंसान बनेगा,
देश  का  सम्मान  बनेगा।

सफलता की  पहचान बनेगा,
तभी तो भारत महान बनेगा।

रचयिता
दुर्गेश्वर राय,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बलुआ,
विकासखंड- उरुवा,
जनपद- गोरखपुर।
मोबाइल नंबर - 8423245550

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माँ और माँ की ममता

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रचनाकार                   अर्चना रानी, सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मुरीदापुर, शाहाबाद, हरदोई।

स्कूल चलो, स्कूल चलो

घर बैठ करोगेक्या? स्कूल चलो स्कूलचलो।
पापा मम्मी सुनोफ़रियाद।
बाकी काम आने केबाद।।
स्कूल चलो स्कूलचलो।
घर बैठ करोगेक्या?                                      
भैया,दीदी छोडो सबकाम।
स्कूल चलो स्कूलचलो।
मिलेगानिःशुल्क प्रवेश, बैग, किताब।
स्कूल चलो स्कूलचलो।
घर बैठ करोगेक्या?                                                   
स्कूल चलो स्कूलचलो।
एमडीएम,फल, दूध से होगाअपना।
तन,

कैसा हो स्कूल हमारा

कैसा हो स्कूल हमारा,
कैसा हो स्कूल हमारा।

बच्चों की किलकारी हो,
पौधों की हरियाली हो।
जन-गण-मन से गूँजे
स्थल,
ऐसा हो प्रार्थना स्थल।
विद्यालय हो घर से प्यारा,
ऐसा हो स्कूल हमारा......

T.L.M. से सजा हो कक्ष,
पाठयोजना बनी हो दक्ष।
विद्यालय आए हर बच्चा हमारा,
ऐसा हो स्कूल हमारा.......

ड्रेस में हो हर एक बच्चा,
वातावरण भी बना हो अच्छा
समयसारिणी से संचालन पूरा,
ऐसा हो स्कूल हमारा..........

गुरुजन आएँ समय से स्कूल,
बच्चों की हो हर दुविधा दूर।
अब न रहेगा कोर्स अधूरा,
ऐसा हो स्कूल हमारा......

गुरुजन कहते बच्चे मेरे,
पढ़-लिखकर दूर करेंगे अंधेरे।
R.T.E. का होगा लक्ष्य पूरा,
ऐसा हो स्कूल हमारा........

शत-प्रतिशत नामांकन होगा,
देश अपना विकसित होगा।
साक्षर होगा स्कूल पूरा.....
ऐसा हो स्कूल हमारा.......




रचनाकार
अजीत कुमार श्रीवास्तव,

स0अ0, उ0प्रा0वि0 मोहम्मदपुर शुमाली,
सैदनगर, रामपुर


1 जुलाई

1 जुलाई खड़ा सामने 
              करता है संकेत ।
निकल गयी गर्मी की छुट्टी
          जैसे कि मुट्ठी से रेत ।।
तरह - तरह बातें फिर भी
           बता रहे थे अफसर ।
खूब दौड़ लगाया कागज
         इस दफ्तर उस दफ्तर ।।
साफ़ सफाई संग कर लो
              अब सब पूरी तैयारी ।
शिक्षण सत्र पुनः शुरू
        करने की है जिम्मेदारी ।।
तन मन को आराम मिला
          तो सोचो अच्छी बात ।
नई जोश व नई विधा से
             करना है शुरुआत ।।
होगी दिवस अनुसार कड़ाई
                प्रांगण में वृक्षारोपन ।
वादन के अनुसार पढ़ाई
            मीनू अनुसार हो भोजन ।।
तरह तरह के पत्र मिलेंगे
            भाँति भाँति फरमान ।
कभी निरीक्षण कभी है वितरण
        भाँति - भाँति गणना पहचान ।।
हो कैसी भी राह मगर
         उसको करना है आसान ।
विचलित होना नहीं कभी
          करते रहना शिक्षा का दान ।।
कभी - कभी शिक्षक लिटमस पेपर से
              पास कराये जाएंगे ।
तरह तरह के हथकंडे
             उन पर अपनाये जाएंगे ।।
सच्ची निष्ठा से अरुण हमें
             अपना फर्ज निभाना है ।
शिक्षक ही सच्चा उन्नायक
            ऐसा विश्वास दिलान…