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जागो जागो हे इंसान

जागो जागो हे इंसान,
पयार्वरण का रखो ध्यान।
ना समझोगे जो यह बात,
तो धोना पड़ेगा जान से हाथ।

अंधाधुंध पेड़ों की कटाई से,
प्रकृति का संतुलन बिगड़ जायेगा ।
ऑक्सीजन नहीं मिलेगी तो,
ऐ! इंसान श्वांस कहाँ से पाएगा।

समय सचेत होने का है अब,
या चिर निद्रा में सोना है।
जीवन के इस पथ पर,
तुमको भी अब सक्रिय होना है।

जागो जागो हे इंसान,
पयार्वरण का रखो ध्यान।
ना समझोगे जो यह बात,
तो धोना पड़ेगा जान से हाथ।

सूख रही हैं नदियाँ,
सूख रहे हैं पोखर।
ख़त्म हो रहा अस्तित्व कुओं का,
ऐ! इंसान खाएगा तू ठोकर।

पयार्वरण से छेड़छाड़ का,
यही होता है परिणाम।
न समझे यह बात तो,
जीवन का क्या रह जायेगा मान। 

जागो जागो हे इंसान,
पयार्वरण का रखो ध्यान।
ना समझोगे जो यह बात,
तो धोना पड़ेगा जान से हाथ।

जय हिंद, जय भारत, जय शिक्षक 

रचनाकार
प्रमोद कुमार, सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय धावनी हसनपुर,
वि0क्षे0-बिलासपुर,
जनपद-रामपुर।
 

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