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हिंदी की महत्ता और वर्तमान में उसकी दुर्दशा का उल्लेख करते कुछ दोहे

आज प्रतीकात्मक रूप से मनाये जाने वाले हिंदी दिवस के दिन हिंदी की महत्ता और वर्तमान में उसकी दुर्दशा का उल्लेख करते कुछ दोहे।
हिंदी
हिन्दी तो अनमोल है, मीठी सुगढ़ सुजान।
देवतुल्य पूजन करो, मातु पिता सम मान।। (1)
दुर्दिन जो हैं दिख रहे, उनके कारण कौन।
सबकी मति है हर गई, सब ठाढ़े हैं मौन।। (2)
ठूंठ बनी हिन्दी खड़ी, धरा लई है खींच।
गूंगे बनकर बोलते, देंखें आँखिन मींच।। (3)
सरकारी अनुदान में, हिन्दी को बइठाय।
अँग्रेजी प्लानिंग करें, ग्रोथ कहाँ से आय।। (4)
जब सोंचे हिन्दी सभी, हिन्दी में हो काम।
हिन्दी में ही बात हो, भली करेंगे राम।। (5)
- डॉ पवन मिश्र
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पवन मिश्र  उ0 प्रा0 वि0 - बरवट, बहुआ जनपद फतेहपुर में प्राथमिक शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। सोशल मीडिया में हिंदी के उभार के प्रतीकों के सानिध्य में रहते हुए अक्सर साहित्यिक अभिव्यक्ति कर बैठते हैं,  और बड़े मन से दावा भी करते हैं कि साहित्यिक परिचय उनके बस की बात नहीं। पवन मिश्र जी का साहित्यशाला में स्वागत है। ~ एडमिन

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