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कविता का उपहार लिखे

भाव शिल्प रस लय में डूबी, कविता का उपहार लिखें
आओ प्रियवर! हम तुम मिलकर सपनों का संसार लिखें
अक्षर अक्षर रस बिखरा हो, पंक्ति पंक्ति मदमाती हो
शब्द शब्द विह्वल सा करदे, अब ऐसा श्रृंगार लिखें
भावों में छलका पड़ता हो, अँगड़ाई लेता यौवन
उस क्षण को आधार बनाकर, प्रियतम को मनुहार लिखें
गीत सवैया दोहा रोला कुण्डलिनी, जो जी चाहे
जिससे गौरव पाये हिन्दी, वो सब कुछ साकार लिखें
कर्मशील वसुधा का कण कण, देता है सन्देश हमें
बढ़ें सकर्मक जीवन पथ पर, सच को ही आधार लिखें
अवसरवादी, मिथ्याचारी, दम्भी हों, धनलोलुप भी
ऐसे लोगों की तृष्णा को, मित्रों मनोविकार लिखें
अति की सदा वर्जना जग में, द्वेष बढे या प्रीति रहे
मानवता के अनुगामी हों, फिर इसका उपचार लिखें
- पुष्पेन्द्र 'पुष्प'

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