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बेमौसम बारिश

February 28, 2015
सन्नाटों की गुफ्तगू में अजब तूफान हैं खामोश लफ्जों में शोर दर्द का बयान हैं हुई है बेमौसम बारिश में कोई साजिश सूनी आँखों में भीगे हुए क...Read More

किस काम की

February 27, 2015
कर्म के बिन कामना, किस काम की भाव के बिन भावना, किस काम की लक्ष्य के बिन व्यर्थ है चलना निरन्तर बिन समर्पण साधना, किस काम की ( पुष्पे...Read More

नरिया विवाद

February 23, 2015
बड़कू,छोट्टन सब पहुंच गये.... जाने काहे की भीड़ लगी... ? फ़ड़वा,तसला सब बिखरा है.... ई काहे की है तना तनी .... ? बोधन चाचा भाग चले..... ...Read More

वजह

February 22, 2015
उजले-उजले कागज़ पर जब स्याही शब्दों के रंग बिखेरती है तो कोई वजह होती है, हर शक्सियत के होते हैं मायने कोई बहुत अच्छा यूँ ही नही ...Read More

आशुतोष अवधूत शिव

February 16, 2015
महाशिवरात्रि की असीम शुभकामनायें आशुतोष अवधूत शिव, हर हर भोलेनाथ। गौरीपति, मर्दन मदन, बंदउँ पद, धरि माथ।। गुणातीत, करुणासदन, हर लो जग...Read More

अगर इजाजत हो

February 14, 2015
फिर नये ख्वाब सजा दूँ अगर इजाजत हो तुम्हीं को तुमसे मिला दूँ अगर इजाजत हो हम ठहर जायें अगर वक्त ठहरता ही नही कश्मकश दिल की मिटा दूँ अग...Read More

सच-झूठ में पला है

February 14, 2015
मोहब्बत भी अजब बला है सपना सच,झूठ में पला है दिल पर काबिज  रहा हमेशा लफ्ज़ जो होंठ से फिसला है फूलों सा महफूज़ कहाँ वो मासूम काँटों...Read More

वैलेंटाइन डे?

February 14, 2015
🌺🍀🌺🍀🌺🍀🌺🍀 प्रेम सृष्टा है, प्रेम दाता है प्रेम अनुभूतियों का नाता है तय नहीं प्रेम का दिवस कोई प्रेम हर पल करीब लाता है - पुष्...Read More

वक़्त की नेमतें

February 12, 2015
एक दिन यूँ ही अचानक दरमियाने तन्हाई.... वक़्त की अबूझ इबारतें पढ़ते, पूछ बैठी वक़्त से क्यूँ इतने दुश्वार हो? फूल हो या ख़ार हो...? उम्र...Read More

जीवन का विश्वास

February 12, 2015
धरती ने नित परहित विकसित किये नवांकुर हैं परहित जीवन जीयें सार्थक वरन क्षणभंगुर है मलयज के संग- संग चले अगर जीवन की श्वांस बने, कलकल ...Read More

तपता

February 05, 2015
कवि जैसी कल्पनाओं से बाहर निकल. यूँ धूप से बच के, अलक की बूँद सा. कुछ तप्त-मन में नमी से रीझा हुआ मन. रे बावरे, तू क्यों उदास है.? हर ...Read More

आँसू

February 01, 2015
मैं जब भी ढलका किसी मासूम की आँखों से तो न जाने कितने ही सपने बचपन की शामें जो सुलगते रहे भूख-अभावों की आग से मेरे अस्तित्व पर हँसत...Read More