Breaking News

श्रृद्धांजलि


चित्रों मे मर्म तीखा
सच्चा था वो तरीका
सब चित्र बोलते थे
कहने का था सलीका
सब लोग समझ लेते
उस चित्र की कहानी
थीं बात ज़िन्दग़ी की
भर दी थी ज़िन्दगानी
श्रृद्धांजली हमारी
है आँख अश्रु पूरित
हम देखते चले थे
कार्टून इक नया नित
उस कलम को नमन है
उस कला को नमन है
मिट्टी से जा मिला जो
वह अमर 'लक्ष्मन' है
(सुधांशु श्रीवास्तव)

कोई टिप्पणी नहीं