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जो व्यर्थ समय को खोएगा

जो व्यर्थ समय को खोएगा
अवसर जाने पर रोयेगा
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धारा में नाविक से झगडा
निश्चय वो नाव डुबोयेगा
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जो कर्म किये हैं उभरेंगे
कब तक दागों को धोयेगा
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मत बांध गठरिया पापों की
वरना जीवन भर ढोयेगा
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जिस मन में समरसता होगी
सपने भी वही संजोयेगा
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क्या खाक जगायेगा जग को
जो दिवस निशा बस सोयेगा
- पुष्पेन्द्र यादव

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